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हमारे शरीर में होते हैं कà¥à¤› किलो जीवाणà¥
इंसान का शरीर किसी अजूबे से कम नहीं. ये कैसे चलता है, कैसे काम करता है--विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के लिठखोज का विषय है. हमारे आपके लिठये हैरान होने का विषय है कि à¤à¤• इंसान के अंदर कम से कम 10 हजार पà¥à¤°à¤•ार के जीवाणॠविषाणॠरहते हैं.
अगर हमारे शरीर में पाठजाने वाले सà¤à¥€ जीवाणà¥à¤“ं कीटाणà¥à¤“ं को इकटà¥à¤ ा कर दिया जाठतो उनका वजन कà¥à¤› किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® तक हो सकता है. अब वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने खोज निकाला है कि हमारे शरीर में कहां और कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में जीवाणॠविषाणॠरहते हैं. वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ शरीर में इनकी तादात 10 हजार तक हो सकती है. इममें से तो कई à¤à¤¸à¥‡ हैं जो इंसान को सेहतमंद बनाने में मददगार à¤à¥€ हैं.
इंसान के शरीर में जीवाणà¥à¤“ं विषाणà¥à¤“ं के असर के बारे में ये खोज à¤à¤• नई बहस को जनà¥à¤® दे सकता है. अमेरिका के नेशनल इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट ऑफ हेलà¥à¤¥ की ओर से चलाई जाने वाली 17 करोड़ 30 लाख अमेरिकी डॉलर की परियोजना के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– डॉकà¥à¤Ÿà¤° फिलिप टार हैं. वो कहते हैं, ''ये जीवाणॠयहां से वहां चलते नहीं है. बलà¥à¤•ि ये खà¥à¤¦ चयापचय की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं. à¤à¤• समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के रूप में हमें उनके तंतà¥à¤° को समà¤à¤¨à¤¾ होगा. जैसे कि हम परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के तंतà¥à¤° को समà¤à¤¤à¥‡ हैं.''
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के 80 शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के 200 वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने पहली बार इकटà¥à¤ ा होकर इस बारे में अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया है. वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने इन जीवाणà¥à¤“ं के डीà¤à¤¨à¤ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने के लिठउनà¥à¤¹à¥€ तरीकों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जैसा कि इंसान के डीà¤à¤¨à¤ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने में करते हैं. इस अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के निषà¥à¤•रà¥à¤·à¥‹à¤‚ को 'नेचर à¤à¤‚ड द पबà¥à¤²à¤¿à¤• लाइबà¥à¤°à¥‡à¤°à¥€ ऑफ साइंस' में पà¥à¤°à¤•ाशित किया गया है.
विषाणॠहमेशा खतरनाक नहीं होते
हालांकि खोज के लिहाज से ये कोई नहीं बात नहीं है. वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• पहले से à¤à¥€ जानते रहे हैं कि हमारे शरीर में कई करोड़ जीवाणॠरहते हैं. ये खोज इस मायने में अलग है कि अब जीवाणà¥à¤“ं को इंसान के सहवीजी के रूप में अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया जा रहा है. इससे पहले तक उनà¥à¤¹à¥‡ बीमारी फैलाने वाले के तौर पर ही याद किया जाता था. शरीर में पाठजाने वाले जीवाणà¥à¤“ं की तादात हमेशा à¤à¤• ही रहती है या ये à¤à¤• ही तरह का काम करते हैं à¤à¤¸à¤¾ नहीं है. वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों का दावा है जीवाणà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ खान पान, रहने की परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के हिसाब से बदलती रहती है. अगर आप à¤à¤‚टीबायोटिक लेते हैं तो कई बार बीमारी फैलाने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के साथ साथ पाचन में सहायता करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ मर जाते हैं.
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